नशे में भी तेरा
नशे में भी तेरा नाम लब पर आता हैचलते हुए मेरे पाँव लड़खड़ाते हैंदर्द सा दिल में उठता है मेरेहसीं चेहरे पर भी दाग नजर आता हैसच्चा प्यार किसी भूत की तरह होता हैबातें...
नशे में भी तेरा नाम लब पर आता हैचलते हुए मेरे पाँव लड़खड़ाते हैंदर्द सा दिल में उठता है मेरेहसीं चेहरे पर भी दाग नजर आता हैसच्चा प्यार किसी भूत की तरह होता हैबातें...
लाजिम नहीं कि उस को भी मेरा ख्याल हो,मेरा जो हाल है वही उसका भी हाल हो,कोई खबर ख़ुशी की कहीं से मिले मुनीर,इस रोज-ओ-शब में ऐसा भी इक दिन कमाल हो।
तोड़ दूं अगर मैं रिश्ते की डोर, तो जोड़ पाओगे क्या ??छोड़ दूं अगर मैं साथ तुम्हारा हाथ, मेरा फिर भी थामोगे क्या ?? खून के आंसूं रुलाती रहूं अगर मैं, इसके बावजूद भी...
तेरी बातों का असरजो छाया है मेरे दिल परयक़ीनन मुझे तड़पाएगाअब ये रात भरसोचा भूल जाऊंगा तुझेअब करूँगा ना यादमगर दर्द ही मिला मुझे,तुझे भूल कर
मोम के पास कभी आग को लेकर देखूंसोचता हूँ के तुझे हाथ लगाकर देखूं मैंने देखा है ज़माने को शराब पीकरदम निकल जाए अगर होश में आकर देखूं दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र...
बड़ी मुश्किल से बना हूँ,टूट जाने के बाद |मै आज भी रो देता हु,अक्सर मुस्कराने के बाद
जरा देखो दरवाजे पे,दस्तक किसने दी है?अगर इश्क़ हो तो कहना,यहां दिल नहीं रहता |
राहे रूकती हैं जब, ज़िन्दगी झुकती हैं तबसर झुकता है जब, वक़्त रुकता हैं तब जमाना हसंता हैं जब, सांसें रूकती हैं तबबाहे दुखती हैं जब, हिम्मत रूकती हैं तब शरीर खंजर सा हो...
आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते होजब भी मन में आये क्यों रुला देते होनिगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो मेरे बहते आंसुओ की...
जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुतयादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश कोमहसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुत दावे...
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