कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना।
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना।
Category: Love
Collection of Real Shayari in Love Category
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कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना
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एक तू है, एक मैं हूँ
एक तू है, एक मैं हूँ,
तू मानता है जान मुझे,
मैं मानती हूँ ज़िन्दगी तुझे,
तेरी हर बात में मैं हूँ,
मेरी हर याद में तू हैं,
तेरी हर नब्ज़ में मैं हूँ,
बस तू ही तू है, बस तू ही तू हैं..!तुजसे दूर हूँ मैं,
मुझसे दूर है तू,
आखिरी पल तक साथ जियेंगे
भले दूर सही दिल से जुड़े रहेंगे
है वादा मेरा निभाऊंगी साथ तेरा
क्युकी मेरे सांस में तू हैं,
बस तू ही तू हैं, बस तू ही तू है..!! -

Hoton par ruk jate hai alfaz mere
Hoton par ruk jate hai alfaz mere
Kaise batau tumhe ki kitne khash ho mere
Intezar ke har pal mein bhi tu hain
Subah ke aagaj, sham ke anjam me bhi tu h
Har din ek dua meri bhi hoti hai
Kash bin kahe sun le dil ke raz tu mere -

तु उड़ती है सपनो में
तु उड़ती है सपनो में,
जब मैं नींद मैं खोता हूँ
मेरे दिल की धड़कन भी,
मैं तुझमे ही सुनता हूँ
बिजली की आहट जैसी है तू,
मैं पानी जैसे बरसता हूँ
ज़िंदगी के हर मोड़ में,
अब मैं तुझको हमसफ़र चाहता हूँ -

ज़िन्दगी से पहले
ज़िन्दगी से पहले, ज़िन्दगी के बाद,
तुझे चाहना बस अब मेरा काम,
इस जन्म में तेरे नहीं हुए तो क्या हुआ?
अगले सातों जन्म सिर्फ तेरे नाम
ये ख़्वाइश हैं मेरी,
अब तुझसे दूर हूँ, या तेरे पास हूँ,
तेरे लबों पे में बस एक मुस्कान हूँ,
तेरे आँखों से बहते हर एक आंसूं का जवाब हूँ
तुझसे दूर कैसे जाऊ, जब तेरे ही पास हूँ
तेरे दिल के दरिया में, मैं बस एक बहती प्यास हूँ -

तू चाँद मैं सितारा होता
तू चाँद मैं सितारा होता,
आसमान में एक आशिया हमारा होता।
लोग तुझे दूर से देखा करते और
सिर्फ पास रहने का हक हमारा होता। -

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना
कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना।
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना। -

ज़िन्दगी के सफ़र में
ज़िन्दगी के सफ़र में आपका सहारा चाहिए
आपके चरणों का बस आसरा चाहिए
हर मुश्किलों का हँसते हुए सामना करेंगे
बस ठाकुर जी आपका एक इशारा चाहिए -

मैंने कब कहा कि, वह मिल जाए मुझे?
मैंने कब कहा कि,
वह मिल जाए मुझे?
कहीं वो गैर ना हो जाए,
बस इतनी सी हसरत है |
उन रिश्तो को भी निभाया है मैंने,
जिनमें न मिलना,
सबसे पहले सर्त थी |
