बरगद की छांव और वो बचपन, आज भी दिल को रुला जाता है
बचपन जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है। ना किसी बात की चिंता थी, ना भविष्य की फिक्र। गांव की गलियों में दोस्तों के साथ खेलना, पेड़ों पर चढ़ना, खेतों में दौड़ना और शाम को दादी-नानी की कहानियां सुनना, यही तो असली खुशियां थीं।
आज शहर की भागदौड़ में सब कुछ है, लेकिन वो मासूमियत, वो सुकून और वो अपनेपन की खुशबू कहीं खो सी गई है। जब भी गांव की याद आती है, बचपन की हर एक तस्वीर आंखों के सामने घूमने लगती है।
Shayari 1
बरगद की छांव और वो बचपन,
आज भी दिल को रुला जाता है,
शहर की इस भीड़ में अक्सर,
मुझे अपना गांव याद आता है।
Shayari 2
कच्ची गलियों का प्यार याद है,
दोस्तों का वो यार याद है,
आज भी आंखें नम हो जाती हैं,
जब बचपन का संसार याद है।
Shayari 3
वो पेड़ों पर चढ़ना याद आता है,
नदी किनारे खेलना याद आता है,
शहर की भागती जिंदगी में,
मुझे अपना गांव याद आता है।
Shayari 4
दादी की कहानियां याद आती हैं,
मां की लोरियां याद आती हैं,
जब भी अकेले बैठते हैं,
बचपन की गलियां याद आती हैं।
Shayari 5
वो मिट्टी की खुशबू प्यारी थी,
हर शाम बड़ी न्यारी थी,
ना कोई चिंता, ना कोई गम,
बस खुशियों की सवारी थी।
Shayari 6
आज भी दिल वहीं बसता है,
जहां बचपन हंसता-खेलता था,
गांव सिर्फ एक जगह नहीं,
मेरा पूरा जहां बसता था।
Shayari 7
वो बारिश में भीगना याद आता है,
दोस्तों संग हंसना याद आता है,
अब तो सिर्फ यादें बाकी हैं,
मुझे वो जमाना याद आता है।
Shayari 8
खेतों की हरियाली प्यारी थी,
हर सुबह बड़ी न्यारी थी,
शहर में सब कुछ है मगर,
गांव की दुनिया सबसे प्यारी थी।
Shayari 9
चौपाल की बातें याद आती हैं,
हर त्योहार की रातें याद आती हैं,
आज भी दिल मुस्कुरा उठता है,
जब गांव की सौगातें याद आती हैं।
Shayari 10
भले ही उम्र बड़ी हो गई,
जिम्मेदारियां भी खड़ी हो गई,
मगर दिल आज भी ढूंढता है,
वो बचपन की छोटी सी गली।
Conclusion
समय बदल जाता है, लेकिन बचपन की यादें और गांव की मिट्टी की खुशबू कभी पुरानी नहीं होती।
