संभाले नहीं संभलता है दिल,
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin ·
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin · Published May 1, 2021
by admin · Published May 17, 2021
by admin · Published December 17, 2021
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