कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे

shayari

कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे
कि दर्द का बबंडर अब संभाला नहीं जाता
कब तक छुपा के रखें आँखों में इसे
कि आंसुओ का समंदर अब संभाला नहीं जाता

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