बुलाती है मगर जाने का नइं | राहत इंदौरी
बुलाती है मगर जाने का नइं | राहत इंदौरी बुलाती है मगर जाने का नइं वो दुनिया है उधर जाने का नइं सितारे नोच कर ले जाऊँगा मैं ख़ाली हाथ घर जाने का नइं...
बुलाती है मगर जाने का नइं | राहत इंदौरी बुलाती है मगर जाने का नइं वो दुनिया है उधर जाने का नइं सितारे नोच कर ले जाऊँगा मैं ख़ाली हाथ घर जाने का नइं...
nashsha-ha shadab-e-rang o saz-ha mast-e-tarab | Mirza Ghalib nashsha-hā shādāb-e-rañg o sāz-hā mast-e-tarab shīsha-e-mai sarv-e-sabz-e-jū-e-bār-e-naġhma hai ham-nashīñ mat kah ki barham kar na bazm-e-aish-e-dost vaañ to mere naale ko bhī e’tibār-e-naġhma hai nashsha-ha shadab-e-rang...
सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम | Mirza Ghalib सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम हैराँ किए हुए हैं दिल-ए-बे-क़रार के आग़ोश-ए-गुल कुशूदा बरा-ए-विदा है ऐ अंदलीब चल कि चले दिन बहार के यूँ बाद-ए-ज़ब्त-ए-अश्क फिरूँ...
सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर | Mirza Ghalib सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर तग़य्युर आब-ए-बर-जा-मांदा का पाता है रंग आख़िर न की सामान-ए-ऐश-ओ-जाह ने तदबीर वहशत की हुआ जाम-ए-ज़मुर्रद भी मुझे दाग़-ए-पलंग आख़िर ख़त-ए-नौ-ख़ेज़ नील-ए-चश्म ज़ख़्म-ए-साफ़ी-ए-आरिज़...
Follow: