Monthly Archive: May 2021

तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आके
कुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन …

तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आकेकुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन … देखो मुझे सर से कदम तक, सिर्फ़ प्यार हूँ मैंगले से लगालो के तुम्हारा बेक़रार हूँ मैंतुम...

इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

इश्क़ वालों से न पूंछो किउनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है जुदा हो हमसफ़र जिसका,वो उसको याद करता है न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता हैसलाम-ए-इश्क़ मेरी जाँ ज़रा...

आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
वो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना

आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़मानावो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना आज़ादियाँ कहाँ वो अब अपने घोँसले कीअपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना लगती हो चोट दिल पर, आता...

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार मेंगुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझेदिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में है टूटे दिल में...

हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआआया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ

हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआ
आया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ

हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआआया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ उम्र भर तुझसे बिछड़ने की कसक ही न गयीकौन कहता है की मुहब्बत का असर ख़त्म हुआ नयी...

हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिए
जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए

हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिएजो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए दर्द भी हमें कुबूल, चैन भी हमें कुबूलहमने हर तरह के फूल, हार में पिरो लिएजो...

साथी न कोई मंज़िल
दिया है न कोई महफ़िल
चला मुझे लेके ऐ दिल
अकेला कहाँ

साथी न कोई मंज़िलदिया है न कोई महफ़िलचला मुझे लेके ऐ दिलअकेला कहाँ हमदम कोई मिले कहींऐसे नसीब ही नहींबेदर्द है ज़मीं, दूर आसमाँसाथी न कोई मंजिल… गलियां हैं अपने देस कीफिर भी हैं...

सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करें
ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें

सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करेंख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न होइस एहतियात से क्या मज़ा की बात करें हमारे...

मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए

मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए मेरे क़ातिलों को ख़बर कीजिए । ज़मीं सख़्त है आसमां दूर है बसर हो सके तो बसर कीजिए । सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल ज़रूरी नहीं चश्म...