संभाले नहीं संभलता है दिल,
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin ·
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin · Published July 2, 2018
by admin · Published January 15, 2021
by admin · Published February 2, 2018 · Last modified April 30, 2018
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