संभाले नहीं संभलता है दिल,
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin ·
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
by admin · Published December 15, 2017 · Last modified April 30, 2018
by admin · Published December 6, 2021
by admin · Published June 11, 2018
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