बंध जाये अगर किसी से रूह का बंधन,

बंध जाये अगर किसी से रूह का बंधन, तो इजहार-ए-इश्क़ को अल्फ़ाज़ की जरूरत नहीं होती।

बंध जाये अगर किसी से रूह का बंधन,
तो इजहार-ए-इश्क़ को अल्फ़ाज़ की जरूरत नहीं होती।

You may also like...