जिसे चाहा उसने कभी समझा ही नहीं

एकतरफा प्यार में इंसान हर पल उम्मीद करता है कि शायद एक दिन सामने वाला उसकी भावनाओं को समझेगा। लेकिन जब उम्मीदें टूटती हैं तो दिल भी टूट जाता है। हर याद दर्द बन जाती है और हर खामोशी चीखने लगती है। ये शायरियां उसी अधूरी मोहब्बत का दर्द बयान करती हैं जिसे लोग जिंदगी भर भूल नहीं पाते।

शायरी 1
जिसे चाहा उसने समझा नहीं,
मेरे दर्द को कभी जाना नहीं,
मैं हर पल उसके लिए जीता रहा,
और उसने मुझे पहचाना नहीं।

शायरी 2
तेरी यादें हर रात रुलाती हैं,
दिल को तन्हा छोड़ जाती हैं,
मोहब्बत अधूरी रह गई मगर,
ये धड़कन आज भी तेरा नाम गाती है।

शायरी 3
मैंने तुझे दिल से अपनाया था,
हर दर्द में साथ निभाया था,
मगर तूने कभी मेरी तरफ देखा नहीं,
और मैंने तुझे खुदा बनाया था।

शायरी 4
अब हर खुशी बेगानी लगती है,
तेरे बिना जिंदगी अधूरी लगती है,
जिसे सबसे ज्यादा चाहा हमने,
वही सबसे ज्यादा पराई लगती है।

शायरी 5
दिल आज भी तुझे चाहता है,
हर पल तेरा इंतजार करता है,
मगर तू किसी और का हो गया,
और ये दिल तन्हा रह गया।

शायरी 6
तेरी आवाज़ सुकून देती थी,
तेरी बातें खुशी देती थीं,
अब सब कुछ अधूरा लगता है,
क्योंकि तू सिर्फ यादों में रहती है।

शायरी 7
मैंने तुझे अपना सब कुछ माना,
हर ख्वाब में सिर्फ तुझे जाना,
मगर तूने कभी मेरा दर्द ना समझा,
और मैंने तुझे अपना जहां माना।

शायरी 8
तेरी मोहब्बत अधूरी रह गई,
दिल की हर खुशी खो गई,
अब सिर्फ दर्द बाकी है,
और आंखें रो-रोकर सो गईं।

शायरी 9
एकतरफा प्यार आसान नहीं होता,
दिल हर दर्द सह लेता है,
जिसे सबसे ज्यादा चाहो अगर,
वही सबसे ज्यादा रुलाता है।

शायरी 10
मोहब्बत में खुद को खो दिया,
तेरे दर्द में खुद को रो दिया,
अब कोई ख्वाहिश बाकी नहीं,
क्योंकि दिल ने सब कुछ खो दिया।

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