इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

जुदा हो हमसफ़र जिसका,
वो उसको याद करता है

न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता है
सलाम-ए-इश्क़ मेरी जाँ ज़रा क़ुबूल कर लो

तुम हमसे प्यार करने की ज़रा सी भूल कर लो
मेरा दिल बेचैन, मेरा दिल बेचैन है हमसफ़र के लिये

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