Category: ग़म

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  • जीने की चाह में हर रोज मरते है

    जीने की चाह में हर रोज मरते है

    जीने की चाह में हर रोज मरते है
    वो आये ना आये हम इंतजार करते है
    झूठा ही सही मेरे प्यार का वादा
    हम आज भी सच मानकर
    उनका एतबार करते है

  • एक अधूरी ख्वाहिश है मेरी

    एक अधूरी ख्वाहिश है मेरी

    एक अधूरी ख्वाहिश है मेरी
    काश वो भी पूरी हो जाये
    ऐ खुदा कुछ ऐसा कर
    कि हमारे विना उनकी हर
    ख्वाहिश अधूरी हो जाये

  • अगर इतनी ही नफरत करते है आप हमसे

    अगर इतनी ही नफरत करते है आप हमसे

    अगर इतनी ही नफरत करते है आप हमसे
    तो रब से ऐसे दुआ करिये
    कि आपकी दुआ भी पूरी हो जाये
    और हमारी जिंदगी भी

  • सच्ची मोहब्बत करना

    सच्ची मोहब्बत करना

    सच्ची मोहब्बत करना
    हर किसी के बस की बात नहीं
    जुनून चाहिए किसी के लिए
    खुद को बर्बाद करने का

  • जिंदगी में जितने हमदर्द मिलते है

    जिंदगी में जितने हमदर्द मिलते है

    जिंदगी में जितने हमदर्द मिलते है
    सच कहु तो सबसे ज्यादा दर्द
    उन्ही से मिलते है |

  • अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं

    अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं

    अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
    यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है

    मीलों के फास्लो में , कुछ ठहराव वो लाती है
    ग़मो की घरी में वह वक़्त को भुलाती है

    जीने की दौड़ भाग में , वो सुकून लाती है
    ज़िन्दगी थम सी जाये , वो एहसास दिलाती है

    अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
    यादों के समादर में , अपना आशियाना बनाती है

    मैं बेपरवाह चलता रहा , मंज़िल की राह में
    फुर्सत के कुछ पल वो , तोहफे में दे जाती है

    सफर -इ -ज़ीस्त की तलाश में , राहों में भटकते हुए
    चलते रहने का वो हौसला दे जाती है

    अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
    यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है

    बीतें लम्हों के कुछ पल वो सामने लाती है
    जीतने की वो , कशिश पैदा कर जाती है

    हर एक हार में . वो सबक सिखाती है
    बढ़ते रहने की हिम्मत , वो मुझमे लाती है

    अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
    यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनती है

    वक़्त की तेज़ रफ़्तार में वो , दौड़ना सिखाती है
    हर एक राह में वो शाइस्तगी लाती है

    यूँ मायूस होकर न बैठ इरफ़ान , ज़िन्दगी अभी बाकी है
    गिरते हुए हर लम्हे में वो , जीत की झलक दिखाती है

    अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
    यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनती है |

  • मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला

    मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला

    मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला…

    अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता …