याद तो उन्हें भी आएंगे,
वह लम्हे, कि कोई तो था,
जब कोई न था|
Category: English
Collection of real and authentic Shayari by Authors across the globe.
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टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
बात छोटी सी है मगर जान,
निकल जाती है
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते -

तूने तो रुला कर रख दिया ए जिंदगी,
तूने तो रुला कर रख दिया ए जिंदगी,
जा कर पूछ मेरी मां से कितने लाडले थे हम,
न जाने क्यों आज अपना घर मुझे अनजान सा लगता है,
तेरे जाने के बाद मां |
यह घर, घर नहीं बस मकान लगता है -

राहे रूकती हैं जब, ज़िन्दगी झुकती हैं तब
सर झुकता है जब, वक़्त रुकता हैं तबराहे रूकती हैं जब, ज़िन्दगी झुकती हैं तब
सर झुकता है जब, वक़्त रुकता हैं तबजमाना हसंता हैं जब, सांसें रूकती हैं तब
बाहे दुखती हैं जब, हिम्मत रूकती हैं तबशरीर खंजर सा हो जाता हैं, आत्मा बंजर सी हो जाती हैं
ना जाने क्यों ये ज़िन्दगी सिमट कर रह जाती हैं | -

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते होआखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते होमेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो
क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो -

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुतजाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुतपनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुतदावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने के
किसी न किसी बहाने से, याद तुझे करती है बहुतआहट से भी चौंक जाए, मुस्कराने से ही कतराए
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, जीने से डरती है बहुत। -

Mili hayaat hi aisi ke haya bhi ro padi
Teri talash mein zalim saza bhi ro padiMili hayaat hi aisi ke haya bhi ro padi
Teri talash mein zalim saza bhi ro padiTujhe toot kar chaha aur itna chaha,
Teri wafaa ki khatir wafa bhi ro padiMera naseeb meri kismat mera mukadar bane tu
Tujhe maangte maangte dua bhi ro padiKitab-e-dil mein tera baab jab band kiya
Khatam karte karte kitaab bhi ro padi -

पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी हैपत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी हैफूलों में ग़ज़ल रखना ये रात की रानी है
इस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी हैएक ज़हन-ए-परेशाँ में वो फूल सा चेहरा है
पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी हैक्यों चांदनी रातों में दरिया पे नहाते हो
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी हैइस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गवानी हैरोने का असर दिल पर रह रह के बदलता है
आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी हैये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है

