अजीब सी आदत है अपनी
अजीब सी आदत है अपनी और गजब सी फितरत है चाहे प्यार हो या नफरत बहुत सिद्धत से करते है
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
नयी और पुरानी हिंदी शायरी का कलेक्शन, आप इन केटेगरी के बारे में पड़ सख्ते हो इनमे से कुछ है जैसे दर्द, प्यार, फ्रेंडशिप, गम, ज़िंदगी, तन्हाई और गम
अजीब सी आदत है अपनी और गजब सी फितरत है चाहे प्यार हो या नफरत बहुत सिद्धत से करते है
कभी कभी विना गलती के भी माफ़ी मांग लेते है हम क्योकि माफ़ी मांग लेने से कोई छोटा नहीं होता
मेरी मोहब्बत बेजुबां होती रही कोई नहीं आया मेरा हाल पूछने मेरी धड़कने अपना वजूद खोती रही बस बारिश थी जो मेरे साथ रोती रही
ना नींद आती है रातों में ना दिन में करार आता है हर घडी हर पल में बस तू ही तू याद आता रहता है
हर कोई प्यार के लिए तड़पता है हर कोई प्यार के लिए रोता है हमारे प्यार को गलत न समझिये क्योकि प्यार तो दोस्ती में भी होता है
उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया उम्र कट गयी लेकिन हमे प्यार करना नहीं आया उसने हमसे कुछ माँगा वो भी जुदाई और हमे उनसे इंकार करना नहीं…
जितना भूलना चाहोगे उतनी याद हमारी आएगी क्योकि तस्वीर बन गयी है दिल की गहराई में हमारी ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर दोस्त तुम देखना तलाश हमसे शुरू होकर हम…
किसी को मोहब्बत की गहराई मार डालती है किसी को मोहब्बत की सच्चाई मार डालती है मोहब्बत करके कोई नई बच पाया आज तक जो बच गया उसको तन्हाई मर…
जल्दी भुला देंगे तुमको थोड़ा सा सब्र तो रखो अंग अंग में बसे हो थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही
तुम्हे कोई दुःख हो हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में यह कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए इन आंसुओ को पढ़ कर देखो वो भी कहंगे कि हम आपके…