Category: Asli Shayar

Iss Category Ke Andar Tamam Asli Shayaro Ki List Hai. Jo Shayari Karte Hai.

  • दिल से दिल तक ट्रेंडिंग शायरी जो आपकी ज़िन्दगी की कहानी कहे

    दिल से दिल तक ट्रेंडिंग शायरी जो आपकी ज़िन्दगी की कहानी कहे

    दिल से दिल तक: ट्रेंडिंग शायरी जो आपकी ज़िन्दगी की कहानी कहे!. कभी-कभी हमारी ज़िंदगी में ऐसे लम्हें आते हैं, जब दिल की बातें शब्दों में नहीं समाती। ऐसे में शायरी ही वो माध्यम बनती है, जो हमारी भावनाओं को सजीव रूप से सामने लाती है। शायरी में छुपे होते हैं रिश्तों के उतार-चढ़ाव, दर्द, खुशी और मोहब्बत के एहसास। आज हम कुछ नई और ट्रेंडिंग शायरी लेकर आए हैं, जो आपके दिल की बात को खूबसूरत तरीके से बयां कर सकती है।

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  • घर से दूर नौकरी शायरी

    घर से दूर नौकरी शायरी

    घर से दूर नौकरी शायरी | (more…)

  • Allama Iqbal Shayari | गर्म-ए-फ़ुग़ाँ है जरस उठ कि गया क़ाफ़िला

    Allama Iqbal Shayari | गर्म-ए-फ़ुग़ाँ है जरस उठ कि गया क़ाफ़िला

    गर्म-ए-फ़ुग़ाँ   है   जरस    उठ कि   गया     क़ाफ़िला

    वाए  वो  रह-रौ  कि  है मुंतज़़िर-ए-राहिला

    तेरी  तबीअत  है  और  तेरा ज़माना  है  और

    तेरे   मुआफ़िक़   नहीं ख़ानक़ही   सिलसिला

    दिल  हो  ग़ुलाम-ए-ख़िरद या  कि  इमाम-ए-ख़िरद

    सालिक-ए-रह  होशियार सख़्त   है   ये   मरहला

    उस  की   ख़ुदी   है   अभी शाम-ओ-सहर   में  असीर

    गर्दिश-ए-दौराँ   का  है   जिस   की    ज़बाँ   पर   गिला

    तेरे   नफ़स   से   हुई   आतिश-ए-गुल   तेज़-तर

    मुर्ग़-ए-चमन   है   यही   तेरी नवा    का   सिला

    गर्म-ए-फ़ुग़ाँ   है   जरस    उठ कि   गया     क़ाफ़िला

    वाए  वो  रह-रौ  कि  है मुंतज़़िर-ए-राहिला

     

  • तस्वीर पर जवाबी शायरी

    तस्वीर पर जवाबी शायरी

    जीवित छवियों के अलावा, चित्रों को भी शायरी का विषय बनाया गया है। चित्र छवियों को प्रतिष्ठित बनाते हैं, लेकिन ये छवियाँ स्थिर होती हैं और बोलने या काम करने के लिए नहीं होतीं हैं। चुपचाप होने पर भी वे सिर्फ खुद के प्यार के लिए संरक्षित रहती हैं क्योंकि वे यादें जागृत करती हैं और एक पूर्व के पल के लिए एक मूल्यवान गिफ्ट के रूप में दिल में रखी जाती हैं। (more…)

  • तन्हाई और जुदाई की गहराइयों को छूने वाली शायरी

    तन्हाई और जुदाई की गहराइयों को छूने वाली शायरी

    आपके मजबूत दिमाग पर दुख या अलगाव की या अलगाव की अवश्यकता का दर्द भी अपने बलवान दिमाग पर बोझ डालता है।

    1. “अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें, जैसे सूखे हुए फूल किताबों में मिलें.” – अहमद फ़राज

     

    2. “किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम, तू मुझसे ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ.” – अहमद फ़राज

     

    3. “अब जुदाई के सफर को मेरे आसान करो, तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो.” – मुनव्वर राना

     

    4. “तुम से बिछड़कर जिंदा हैं, जान बहुत शर्मिंदा हैं.” – इफ़्तिखार आरिफ

     

    5. “मिलना था इत्तिफाक, बिछड़ना नसीब था, वो उतनी दूर हो गया जितनी क़रीब था.” – अंजुम रेहबर

     

    6. “जिस की आँखों में कटी थीं सदियां, उसने सदियों की जुदाई दी है.” – गुलज़ार

     

    7. “उस को रुक्शत तो किया था मुझे मालूम न था, सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला.” – निदा फ़ाज़ली

     

    8. “कुछ ख़बर है तुझे ओ चैन से सोने वाले, रात भर कौन तेरी याद में बेदार रहा.” – हिज्र नाज़िम अली ख़ान

     

    9. “यूँ लगे दोस्त तिरा मुझसे ख़फ़ा हो जाना, जैसे फूल से ख़ुश्बू का जुदाहो जाना.” – क़तील शिफ़ाई

     

    10. “बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई, इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया.” – ख़ालिद शरीफ

     

    11. “वस्ल में रंग उड़ गया मेरा, क्या जुदाई को मुँह दिखाऊंगा.” – मीर ताक़ी मीर

     

    12. “याद है अब तक तुझ से बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे, तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल.” – नसीर क़ाज़मी

     

    13. “मैंने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले, तू ने जाकर तो जुदाई मेरी किस्मत कर दी.” – अहमद नदीम क़ासमी

     

    14. “उसी मक़ाम पे कल मुझको देख कर तन्हा, बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले.” – जमाल एहसानी

     

    15. “महीने वसल के घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं, मगर घड़ियां जुदाई की गुज़रती हैं महीनों में.” – अल्लामा इक़बाल

     

    16. “लगी रहती है अश्कों की झड़ी गर्मी हो सर्दी हो, नहीं रुकती कभी बरसात जब से तुम नहीं आए.” – अंवर शूर

     

    17. “तुझ से क़िस्मत में मेरी सूरत-ए-कुफ्ल-ए-अबजद, था लिखा बात के बंटे ही जुदाहो हो जाना.” – मिर्ज़ा ग़ालिब

     

    18. “ख़ुद चले आओ या बुला भेजो, रात अकेले बसर नहीं होती.” – आज़िज़ लखनवी

     

    19. “चमकते चाँद से चेहरों के मंज़र से निकल आए, ख़ुदा हाफ़िज़ कहा बोसा लिया घर से निकल आए.” – फ़ुज़ैल जाफ़री

  • अल्लामा इक़बाल की 20 शेरों की टॉप शायरी

    अल्लामा इक़बाल की 20 शेरों की टॉप शायरी

    1. “ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है.”

    इस शेर में अल्लामा इकबाल ने ख़ुदी के महत्व को बताया है, और यह उत्कृष्टता की ओर एक कदम बढ़ाने का संकेत देता है।

    2. “सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं.”

    इस शेर में अल्लामा इकबाल ने मानवीय आत्मा के अद्वितीय गुणों की तारीफ की है और इश्क़ के अद्वितीय अनुभव को बताया है।

    3. “माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं, तू मेरा शौक़ देख, मेरा इंतेज़ार देख.”

    इस शेर में शायर ने इश्क़ के आगमन की आस दिखाई है, जिसमें वह अपने प्यार की तरफ उत्सुक हैं।

    4. “तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ, मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ.”

    इस शेर में इश्क़ की अत्यंतता को बयान किया गया है, जब शायर अपने प्यार को आत्मा के साथ जोड़ते हैं।

    5. “तू शाहीं है पर्वाज़ है काम तेरा, तिरे सामने आस्मां और भी हैं.”

    इस शेर में अल्लामा इकबाल ने आत्मनिर्भरता और स्वाधीनता के महत्व को बताया है, जब वह आत्मा के उच्चारण का महत्व बताते हैं।

    6. “नशा पिला के गिराना तो सब को आता है, मज़ा तो तब है कि गिर्तों को थाम ले साक़ी.”

    इस शेर में विश्वास और आनंद का महत्व बताया गया है, जब आप संघर्षों को पार करते हैं और अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं।

    7. “हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा.”

    इस शेर में सृजनात्मकता के महत्व को बताया गया है, जब शायर ने सृजनात्मक प्रक्रिया की महत्वपूर्णता को जताया है।

    8. “अपने मन में डूब कर पाज़ सफर दिया था क्यूँ, तू अगर मेरा नहीं बन्ता, तो बन अपना तो बन.”

    इस शेर में स्वतंत्रता और आत्मसमर्पण की बदलती धारा को बताया गया है, जब आप अपने मन की दुनिया को जीते हैं।

    9. “अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़ल, लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे.”

    इस शेर में संतुलन की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जब आप अपने जीवन के सभी पहलुओं का सामंजस्य बनाते हैं।

    10. “दिल से जो बात निकलती है, असर रखती है, पर नहीं ताक़त-ए-पर्वाज़ मगर रखती है.”

    इस शेर में आदर्श और आत्मसमर्पण की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जब आप अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम करते हैं।

    11. “जिस खेत से दहकां को मयस्सर नहीं रोज़ी, उस खेत के हर खोशा-ए-गंधम को जला दो.”

    इस शेर में उत्सव की अहमियत बताई गई है, जब आप अपने काम को पूरा करने के लिए अपने संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करते हैं।

    12. “यक़ीन मोहक्कम अमल, पैहम मोहब्बत, फ़ातेह-ए-आलम, जिहाद-ए-ज़िन्दगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें.”

    इस शेर में साहस और उत्साह के महत्व को बताया गया है, जब आप अपने जीवन के लिए संघर्ष करते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं।

    13. “अनोखी वज़.आ है सारे ज़माने से निराले हैं, ये आशिक कौन सी बस्ती के यारब रहने वाले हैं.”

    इस शेर में आदर्शपुर्ण और अनूठे प्यार के महत्व को बताया गया है, जब आप अपने प्यार के लिए सब कुछ त्याग देते हैं।

    14. “बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक़्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ, कार-ए-जहां दराज़ है अब मेरा इंतेज़ार कर.”

    इस शेर में उत्कृष्टता के लिए उत्कृष्टता की ओर एक कदम बढ़ाने का संकेत दिया गया है, जब आप अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अपनी मेहनत करते हैं।

    15. “तू ने ये क्या ग़ज़ब किया, मुझे भी फ़ाश कर दिया, मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में.”

    इस शेर में अपनी विशेषता को स्वीकार करने की महत्वपूर्णता बताई गई है, जब आप खुद को स्वीकार करते हैं और अपने असली आत्मा का परिचय करते हैं।

    16. “ना पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमां-बरबाद रहने की, नशेमन सैकड़ों में ने बना कर फूंक डाले हैं.”

    इस शेर में जीवन की अस्थायिता और आत्म-नियंत्रण की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जब आप अपने उद्देश्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं।

    17. “उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं, कि ये टूटा हुआ तारा माह-ए-कामिल न बन जाए.”

    इस शेर में संघर्ष और समर्पण के महत्व को बताया गया है, जब आप अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए काम करते हैं और निरंतर प्रयास करते हैं।

    18. “तूफाँ न कभी आया कभी बिगड़ न कभी गिरा, ना डर उस का रहा ना ग़ाम उसका रहा.”

    इस शेर में सहस की महत्वपूर्णता और आत्मविश्वास की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जब आप जीवन के चुनौतियों का सामना करते हैं।

    19. “हर दर्द-ओ-ग़म का सिलसिला क़यामत तक रहे, हम आदमी हैं हमें ख़ुद ख़ुदा करके गुज़रना है।”

    इस शेर में आत्मा की आदर्शपुर्णता को बताया गया है, जब आप अपने जीवन के अधिकांश पाठों को सीखने और समझने का प्रयास करते हैं।

    20. “इब्न-ए-आदम से हुक्मरां के लिए कुछ ख़ास है, इनसान को ख़ुद को पहचानने का दौर लगाना है.”

    इस शेर में आत्म-समझ की महत्वपूर्णता और जीवन के अद्वितीय अनुभव की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जब आप अपने आत्मा को समझने का प्रयास करते हैं।

  • याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे | मिर्ज़ा ग़ालिब

    याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे | मिर्ज़ा ग़ालिब

    याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे | मिर्ज़ा ग़ालिब

     

    याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे

    सुब्हा-ए-ज़ाहिद हुआ है ख़ंदा ज़ेर-ए-लब मुझे

     

    है कुशाद-ए-ख़ातिर-ए-वा-बस्ता दर रहन-ए-सुख़न

    था तिलिस्म-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद ख़ाना-ए-मकतब मुझे

     

    या रब इस आशुफ़्तगी की दाद किस से चाहिए

    रश्क आसाइश पे है ज़िंदानियों की अब मुझे

     

    तब्अ’ है मुश्ताक़-ए-लज़्ज़त-हा-ए-हसरत क्या करूँ

    आरज़ू से है शिकस्त-ए-आरज़ू मतलब मुझे

     

    दिल लगा कर आप भी ‘ग़ालिब’ मुझी से हो गए

    इश्क़ से आते थे माने मीरज़ा साहब मुझे

     

    याद है शादी में भी हंगामा-ए-या-रब मुझे | मिर्ज़ा ग़ालिब

  • अक्सर लगता है कि सब कुछ हो गया बर्बाद | Real Shayari

    अक्सर लगता है कि सब कुछ हो गया बर्बाद | Real Shayari

    अक्सर लगता है कि सब कुछ बर्बाद हो गया,

    सब कुछ बिगड़ गया हमारे साथ।

    कोशिश की हो या न कोशिश की,

    नहीं मिलती कुछ प्यार की बात।

     

    कुछ लोग कहते हैं कि सब कुछ मन के हाथ में,

    किसी की किस्मत नहीं बदलती किसी के कहने से।

    लेकिन मैं यह समझता हूँ कि समय के साथ,

    सब कुछ बदलता है, सब कुछ हमारे साथ।

     

    पर कुछ बिगड़े नहीं जाते, कुछ कह नहीं सकते,

    कुछ समय को कह नहीं सकते, कुछ कह नहीं सकते।

    कुछ कुछ कहने को बंद कर दिया है,

    कुछ कुछ कहने को समय कह नहीं सकते।

     

    अक्सर लगता है कि सब कुछ बर्बाद हो गया,

    सब कुछ बिगड़ गया हमारे साथ।

    कोशिश की हो या न कोशिश की,

    नहीं मिलती कुछ प्यार की बात।

  • इस दुनिया में कुछ नहीं होता है सच | Real Shayari

    इस दुनिया में कुछ नहीं होता है सच | Real Shayari

    इस दुनिया में कुछ नहीं होता है सच,

    सब कुछ फर्क ही फर्क होता है।

    कोई दिल से प्यार करता है,

    कोई दिल को धोखा देता है।

     

    हमने खोजा है कई दिलचस्प रास्ते,

    पर कुछ नहीं मिला हमें सच से।

    कुछ हमें दुःख दिया, कुछ हमें खुशी,

    पर सच को मिलने का कोई रास्ता नहीं।

     

    किसी को कहते हैं हम प्यार करते हैं,

    किसी को कहते हैं हम बदनसीब हैं।

    पर सब कुछ हमारे दिल में है,

    जो कहने को कहते हैं हम सुनने को।

     

    इस दुनिया में कुछ नहीं होता है सच,

    सब कुछ फर्क ही फर्क होता है।

    कोई दिल से प्यार करता है,

    कोई दिल को धोखा देता है।

  • Door Rehna Aapka Humse Saha Nahi Jata

    Door Rehna Aapka Humse Saha Nahi Jata

    Door Rehna Aapka Humse Saha Nahi Jata,

    Juda Hoke Aapse Humse Raha Nahi Jata,

    Ab To Wapas Laut Aaiye Hamare Paas,

    Dil Ka Haal Ab Kisi Se Kaha Nahi Jata.

    Door Rehna Aapka Humse Saha Nahi Jata…

    In dooriyon ki na parwah kijiye,

    Dil kare jab hame pukaar leejiye,

    Jyaada door nahi hain ham aapse,

    Bas ek call karke hame bula leejiye.

    Dur Rahkar Bhi tum rahte ho mere Pass

    Apki har baat mere liye hai khas yakin karo

    Karo meri baat par vishwas kitna khubsurat

    Hai apke hone ka ehsas..

    Dooriyan hai hamare beech lekin

    dilo me hamare pyar hai,Jeetenge

    ham hi ek din hogi in faslon ki haar hai.

    Humare Bich ki ye duri ab sahi nahi jati

    Shaam savere ab sirf teri yaad hai Aati

    Tere sath ki Aadat lagi thi is kadar mujhe

    in dino apni saheliyan bhi nahi bhati..

    Tum puchti ho na mujhe sone jane ki

    itni jaldi kyun Hoti hai, to suno kyuki Roz

    sapno me meri tum se mulakat hoti Hai.

    Din ye kat jaate hain lekin raaten

    Chand ko dekh kar ha katti benglor

    se Dilli tak ki duri saat samandar

    Par jesi hai lagti..

    Yaad Aati ho tum, to ye Aankhe bhar

    Aati Hain din kat jaate hain ye raten

    Bahut satati Hain khush kismat hun

    ki saya ho tum mera jese chandni

    chand ka sath nibhati Hai..

    Kaash Meri Ek Khwahish Poori Ho

    Meri Ibadat Ke Bagair,Woh Aakar

    Mujhe Apne Gale Laga Le Meri

    Ijaajat Ke Bagair.

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